शुभदिन पंचांग · shubhdinpanchang.com · दिल्ली
आज का मेष राशिफल
आज सँभल कर पूरे दिन व्यय
ख़र्च का दिन, बचत मुश्किल
- चन्द्रमा
- मीन में · आपकी राशि से भाव 12
- चन्द्र बल
- चाँद आज कमज़ोर है — बड़े फ़ैसले टालें · चन्द्र बल कमज़ोर
- शास्त्र का फल
- व्यय
क्यों
- चाँद आज कमज़ोर है — बड़े फ़ैसले टालेंव्यय — चन्द्रमा आपकी राशि से 12वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — सँभल करचन्द्र आपकी राशि से 12वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 28 सितम्बर तकPhaladeepika 26.2
- प्रेम और साथ — सँभल करशुक्र आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 6 नवम्बर तकPhaladeepika 26.2
- काम-काज — शुभबुध आपकी राशि से 6वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में गिना जाता है · 26 सितम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 4वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — रुका हुआसूर्य 6वें भाव में तो शुभ है, पर 12वें भाव में चन्द्र बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 17 अक्टूबर तकवेध: चन्द्र भाव 12 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
शनि साढ़ेसाती चल रही है 29 मार्च 2025 – 31 मई 2032 व्यर्थ परिश्रम; शत्रुओं से हानि; पत्नी और पुत्र रुग्ण
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 12
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (12वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- साढ़ेसाती पर वेध लागू ही नहीं होतावेध केवल शुभ गोचर को रोकता है, और शनि के शुभ भाव तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं (फलदीपिका 26.2)। यहाँ रोकने को कुछ है ही नहीं।
- विलोम वेध की राहत यहाँ नहीं बनतीचन्द्रमा से तीसरी राशि (मिथुन) अभी ख़ाली है।
आज सँभल कर पूरे दिन व्यय
ख़र्च का दिन, बचत मुश्किल
- चन्द्रमा
- मीन में · आपकी राशि से भाव 12
- चन्द्र बल
- चाँद आज कमज़ोर है — बड़े फ़ैसले टालें · चन्द्र बल कमज़ोर
- शास्त्र का फल
- व्यय
क्यों
- चाँद आज कमज़ोर है — बड़े फ़ैसले टालेंव्यय — चन्द्रमा आपकी राशि से 12वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — सँभल करचन्द्र आपकी राशि से 12वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 28 सितम्बर तकPhaladeepika 26.2
- प्रेम और साथ — सँभल करशुक्र आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 6 नवम्बर तकPhaladeepika 26.2
- काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 दिसम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 4वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — रुका हुआसूर्य 6वें भाव में तो शुभ है, पर 12वें भाव में चन्द्र बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 17 अक्टूबर तकवेध: चन्द्र भाव 12 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
शनि साढ़ेसाती चल रही है 29 मार्च 2025 – 31 मई 2032 व्यर्थ परिश्रम; शत्रुओं से हानि; पत्नी और पुत्र रुग्ण
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 12
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (12वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- साढ़ेसाती पर वेध लागू ही नहीं होतावेध केवल शुभ गोचर को रोकता है, और शनि के शुभ भाव तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं (फलदीपिका 26.2)। यहाँ रोकने को कुछ है ही नहीं।
- विलोम वेध की राहत यहाँ नहीं बनतीचन्द्रमा से तीसरी राशि (मिथुन) अभी ख़ाली है।
आज सँभल कर 10:16 am तक व्यय
ख़र्च का दिन, बचत मुश्किल
- चन्द्रमा
- मीन में · आपकी राशि से भाव 12
- चन्द्र बल
- चाँद आज कमज़ोर है — बड़े फ़ैसले टालें · चन्द्र बल कमज़ोर
- शास्त्र का फल
- व्यय
क्यों
- चाँद आज कमज़ोर है — बड़े फ़ैसले टालेंव्यय — चन्द्रमा आपकी राशि से 12वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
फिर शुभ 10:16 am से सुख
मन प्रसन्न, काम में मन लगेगा
- चन्द्रमा
- मेष में · आपकी राशि से भाव 1
- चन्द्र बल
- चाँद आज आपके साथ है · चन्द्र बल अनुकूल
- शास्त्र का फल
- सुख
क्यों
- चाँद आज आपके साथ हैसुख — चन्द्रमा आपकी राशि से 1वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — सँभल करचन्द्र आपकी राशि से 12वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 28 सितम्बर तकPhaladeepika 26.2
- प्रेम और साथ — सँभल करशुक्र आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 6 नवम्बर तकPhaladeepika 26.2
- काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 दिसम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 4वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — रुका हुआसूर्य 6वें भाव में तो शुभ है, पर 12वें भाव में चन्द्र बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 17 अक्टूबर तकवेध: चन्द्र भाव 12 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
शनि साढ़ेसाती चल रही है 29 मार्च 2025 – 31 मई 2032 व्यर्थ परिश्रम; शत्रुओं से हानि; पत्नी और पुत्र रुग्ण
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 12
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (12वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- साढ़ेसाती पर वेध लागू ही नहीं होतावेध केवल शुभ गोचर को रोकता है, और शनि के शुभ भाव तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं (फलदीपिका 26.2)। यहाँ रोकने को कुछ है ही नहीं।
- विलोम वेध की राहत यहाँ नहीं बनतीचन्द्रमा से तीसरी राशि (मिथुन) अभी ख़ाली है।
आज शुभ पूरे दिन सुख
मन प्रसन्न, काम में मन लगेगा
- चन्द्रमा
- मेष में · आपकी राशि से भाव 1
- चन्द्र बल
- चाँद आज आपके साथ है · चन्द्र बल अनुकूल
- शास्त्र का फल
- सुख
क्यों
- चाँद आज आपके साथ हैसुख — चन्द्रमा आपकी राशि से 1वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — रुका हुआचन्द्र 1वें भाव में तो शुभ है, पर 5वें भाव में केतु बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 30 सितम्बर तकवेध: केतु भाव 5 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
- प्रेम और साथ — सँभल करशुक्र आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 6 नवम्बर तकPhaladeepika 26.2
- काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 दिसम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 4वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — रुका हुआसूर्य 6वें भाव में तो शुभ है, पर 12वें भाव में शनि बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 17 अक्टूबर तकवेध: शनि भाव 12 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
शनि साढ़ेसाती चल रही है 29 मार्च 2025 – 31 मई 2032 व्यर्थ परिश्रम; शत्रुओं से हानि; पत्नी और पुत्र रुग्ण
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 12
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (12वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- साढ़ेसाती पर वेध लागू ही नहीं होतावेध केवल शुभ गोचर को रोकता है, और शनि के शुभ भाव तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं (फलदीपिका 26.2)। यहाँ रोकने को कुछ है ही नहीं।
- विलोम वेध की राहत यहाँ नहीं बनतीचन्द्रमा से तीसरी राशि (मिथुन) अभी ख़ाली है।
आज शुभ 1:13 pm तक सुख
मन प्रसन्न, काम में मन लगेगा
- चन्द्रमा
- मेष में · आपकी राशि से भाव 1
- चन्द्र बल
- चाँद आज आपके साथ है · चन्द्र बल अनुकूल
- शास्त्र का फल
- सुख
क्यों
- चाँद आज आपके साथ हैसुख — चन्द्रमा आपकी राशि से 1वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
फिर सामान्य 1:13 pm से धन-हानि
ख़र्च बढ़ सकता है, सोच-समझकर चलें
- चन्द्रमा
- वृषभ में · आपकी राशि से भाव 2
- चन्द्र बल
- चाँद न साथ है, न ख़िलाफ़ · चन्द्र बल सामान्य
- शास्त्र का फल
- धन-हानि
क्यों
- चाँद न साथ है, न ख़िलाफ़धन-हानि — चन्द्रमा आपकी राशि से 2वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — रुका हुआचन्द्र 1वें भाव में तो शुभ है, पर 5वें भाव में केतु बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 30 सितम्बर तकवेध: केतु भाव 5 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
- प्रेम और साथ — सँभल करशुक्र आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 6 नवम्बर तकPhaladeepika 26.2
- काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 दिसम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 4वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — रुका हुआसूर्य 6वें भाव में तो शुभ है, पर 12वें भाव में शनि बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 17 अक्टूबर तकवेध: शनि भाव 12 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
शनि साढ़ेसाती चल रही है 29 मार्च 2025 – 31 मई 2032 व्यर्थ परिश्रम; शत्रुओं से हानि; पत्नी और पुत्र रुग्ण
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 12
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (12वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- साढ़ेसाती पर वेध लागू ही नहीं होतावेध केवल शुभ गोचर को रोकता है, और शनि के शुभ भाव तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं (फलदीपिका 26.2)। यहाँ रोकने को कुछ है ही नहीं।
- विलोम वेध की राहत यहाँ नहीं बनतीचन्द्रमा से तीसरी राशि (मिथुन) अभी ख़ाली है।
आज सामान्य पूरे दिन धन-हानि
ख़र्च बढ़ सकता है, सोच-समझकर चलें
- चन्द्रमा
- वृषभ में · आपकी राशि से भाव 2
- चन्द्र बल
- चाँद न साथ है, न ख़िलाफ़ · चन्द्र बल सामान्य
- शास्त्र का फल
- धन-हानि
क्यों
- चाँद न साथ है, न ख़िलाफ़धन-हानि — चन्द्रमा आपकी राशि से 2वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — सँभल करचन्द्र आपकी राशि से 2वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- प्रेम और साथ — सँभल करशुक्र आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 6 नवम्बर तकPhaladeepika 26.2
- काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 दिसम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 4वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — रुका हुआसूर्य 6वें भाव में तो शुभ है, पर 12वें भाव में शनि बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 17 अक्टूबर तकवेध: शनि भाव 12 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
शनि साढ़ेसाती चल रही है 29 मार्च 2025 – 31 मई 2032 व्यर्थ परिश्रम; शत्रुओं से हानि; पत्नी और पुत्र रुग्ण
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 12
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (12वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- साढ़ेसाती पर वेध लागू ही नहीं होतावेध केवल शुभ गोचर को रोकता है, और शनि के शुभ भाव तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं (फलदीपिका 26.2)। यहाँ रोकने को कुछ है ही नहीं।
- विलोम वेध की राहत यहाँ नहीं बनतीचन्द्रमा से तीसरी राशि (मिथुन) अभी ख़ाली है।
आज सामान्य 3:40 pm तक धन-हानि
ख़र्च बढ़ सकता है, सोच-समझकर चलें
- चन्द्रमा
- वृषभ में · आपकी राशि से भाव 2
- चन्द्र बल
- चाँद न साथ है, न ख़िलाफ़ · चन्द्र बल सामान्य
- शास्त्र का फल
- धन-हानि
क्यों
- चाँद न साथ है, न ख़िलाफ़धन-हानि — चन्द्रमा आपकी राशि से 2वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
फिर शुभ 3:40 pm से सफलता
आज काम बनने का दिन है
- चन्द्रमा
- मिथुन में · आपकी राशि से भाव 3
- चन्द्र बल
- चाँद आज आपके साथ है · चन्द्र बल अनुकूल
- शास्त्र का फल
- सफलता
क्यों
- चाँद आज आपके साथ हैसफलता — चन्द्रमा आपकी राशि से 3वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — सँभल करचन्द्र आपकी राशि से 2वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- प्रेम और साथ — सँभल करशुक्र आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 6 नवम्बर तकPhaladeepika 26.2
- काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 दिसम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 4वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — रुका हुआसूर्य 6वें भाव में तो शुभ है, पर 12वें भाव में शनि बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 17 अक्टूबर तकवेध: शनि भाव 12 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
शनि साढ़ेसाती चल रही है 29 मार्च 2025 – 31 मई 2032 व्यर्थ परिश्रम; शत्रुओं से हानि; पत्नी और पुत्र रुग्ण
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 12
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (12वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- साढ़ेसाती पर वेध लागू ही नहीं होतावेध केवल शुभ गोचर को रोकता है, और शनि के शुभ भाव तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं (फलदीपिका 26.2)। यहाँ रोकने को कुछ है ही नहीं।
- विलोम वेध की राहत यहाँ नहीं बनतीचन्द्रमा से तीसरी राशि (मिथुन) अभी ख़ाली है।
यह गोचर है: चन्द्रमा की चाल आपकी राशि से गिनी गई (फलदीपिका, अध्याय 26)। जन्म-नक्षत्र से तारा बल भी जुड़ता है, जो ऐप में है।
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक, समुद्र-तल क्षितिज पर, इसी फ़ोन-ऐप के इंजन से गिना हुआ। कोई अनुमान नहीं। तरीक़ा ›
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