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शुभदिन पंचांग · shubhdinpanchang.com · दिल्ली

आज का मीन राशिफल

26 सितम्बर 2026 · शनिवार

आज शुभ पूरे दिन सुख

मन प्रसन्न, काम में मन लगेगा

चन्द्रमा
मीन में · आपकी राशि से भाव 1
चन्द्र बल
चाँद आज आपके साथ है · चन्द्र बल अनुकूल
शास्त्र का फल
सुख

क्यों

  • चाँद आज आपके साथ हैसुख — चन्द्रमा आपकी राशि से 1वें भाव में

यह क्या नहीं देखता

  • ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
  • यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
  • ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं

किस ओर क्या

  • मन — रुका हुआचन्द्र 1वें भाव में तो शुभ है, पर 5वें भाव में मंगल बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 28 सितम्बर तकवेध: मंगल भाव 5 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
  • प्रेम और साथ — रुका हुआशुक्र 8वें भाव में तो शुभ है, पर 5वें भाव में मंगल बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 6 नवम्बर तकवेध: मंगल भाव 5 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
  • काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 26 सितम्बर तकPhaladeepika 26.2
  • धन — शुभगुरु आपकी राशि से 5वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में गिना जाता है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
  • सेहत — सँभल करसूर्य आपकी राशि से 7वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 17 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2

शनि साढ़ेसाती चल रही है 29 अप्रैल 2022 – 17 अप्रैल 2030 रोग; अन्त्येष्टि कर्म करना

शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 1

  • यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
  • “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
  • शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
  • चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (1वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
  • साढ़ेसाती पर वेध लागू ही नहीं होतावेध केवल शुभ गोचर को रोकता है, और शनि के शुभ भाव तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं (फलदीपिका 26.2)। यहाँ रोकने को कुछ है ही नहीं।
  • इस चरण की कोई शास्त्रोक्त राहत नहीं हैपहले और दूसरे भाव का किसी वेध-जोड़े में नाम ही नहीं आता। केवल बारहवें चरण की राहत है।

यह गोचर है: चन्द्रमा की चाल आपकी राशि से गिनी गई (फलदीपिका, अध्याय 26)। जन्म-नक्षत्र से तारा बल भी जुड़ता है, जो ऐप में है।

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक, समुद्र-तल क्षितिज पर, इसी फ़ोन-ऐप के इंजन से गिना हुआ। कोई अनुमान नहीं। तरीक़ा ›

ऐप में: रिमाइंडर और होम-स्क्रीन विजेट ›